जापान में भूकंप के बाद सुनामी 6 जख्मी न्यूक्लियर प्लांट पर पड़ा असर

मंगलवार सुबह करीब 6 बजे जापान के उत्तरी इलाके में भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्‍टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.9 थी। इसके बाद नॉर्थ पैसिफिक कोस्टल एरिया में सुनामी आ गई। 10 फीट तक लहरें उठीं। 6 घायल हुए। भूकंप का केंद्र फुकुशिमा के पास जमीन के 10 किमी नीचे था। इसके चलते यहां न्यूक्लियर प्लांट के कूलिंग ऑपरेशन पर असर पड़ा है। 2011 में सुनामी के चलते न्यूक्लियर प्लांट का कुछ हिस्सा डैमेज हो गया था। जापान के पब्लिक ब्रॉडकास्टर एनएचके के मुताबिक, टोक्‍यो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन, भूकंप के मद्देनजर फुकुशिमा में अपने एटमी प्‍लान्ट में नुकसान का जायजा ले रहा है। तोहोकू इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन ने कहा कि उसके ओनागावा न्यूक्लियर प्‍लान्ट को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। 2011 में जापान के फुकुशिमा में ही 9 तीव्रता का भूकंप रिकॉर्ड किया गया था। इससे न्यूक्लियर प्लान्ट को भारी नुकसान पहुंचा था। लीकेज के कारण आग लग गई थी। कई हिस्से तबाह हो गए थे। इसके कारण देश के सभी न्यूक्लियर प्लांट बंद कर दिए गए थे। फुकुशिमा प्लांट में इमरजेंसी का एलान कर दिया गया था।
जापान भूकंप के सबसे ज्यादा सेंसिटिव एरिया में है। यह पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में आता है। रिंग ऑफ फायर ऐसा इलाका है, जहां कई कॉन्टिनेंटल के साथ ही ओशियनिक टेक्टॉनिक प्लेट्स भी हैं। ये प्लेट्स आपस में टकराती हैं तो भूकंप आता है, सुनामी उठती है और वॉल्केनो फटते हैं। इस रिंग ऑफ फायर का असर न्यूजीलैंड से लेकर जापान, अलास्का और उत्तर और साउथ अमेरिका तक देखा जा सकता है। दुनिया के 90% भूकंप इसी रिंग आफ फायर में आते हैं। यह इलाका 40 हजार किलोमीटर में फैला है। दुनिया में जितने एक्टिव वॉल्केनो हैं, उनमें से 75% इसी एरिया में हैं। 15 देश इस रिंग ऑफ फायर की जद में हैं। जापान, रूस, फिलीपींस, इंडोनेशिया, न्यूजीलैंड, अंटार्कटिका, कनाडा, अमेरिका, मेक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पेरू, इक्वाडोर, चिली, बोलिविया।

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