रामपाल दो मामलों में बरी हुआ, अन्य मामलो के फैसले तक जेल में ही रहना होगा

न्यायिक दंडाधिकारी मुकेश कुमार की अदालत में चल रहे साल 2014 के सतलोक आश्रम मामले में बरवाला थाने में दर्ज हुए दो मामलों पर मंगलवार को फैसला आया। हिसार कोर्ट ने रामपाल को इन मामलों में बरी कर दिया। इसमें आश्रम संचालक रामपाल सहित अन्य आरोपी शामिल थे। स्वयंभू रामपाल धारा 426 और 427 के मामले में बरी हो गया है। लेकिन उस पर अभी और भी केस चल रहे हैं तो ऐसे में उसे जेल में ही रहना होगा। इस मामले में कानूनी जानकारों का मानना था कि जिन धाराओं के तहत केस दर्ज हैं, उनमें 3 साल तक की सजा का प्रावधान है। लेकिन रामपाल को पूरी तरह से बरी कर दिया गया। इस मामले में बहस पूरी हो चुकी थी और फैसला भी 24 अगस्त को आना था, लेकिन 25 अगस्त को पंचकूला की सीबीआई कोर्ट में साध्वी यौन शोषण मामले में गुरमीत राम रहीम पर फैसले के चलते बरवाला पुलिस के आग्रह पर अदालत ने इसे 29 अगस्त तक टाल दिया था। संत रामपाल का तो मामला ही बिल्कुल अलग है। साल 2014 में रामपाल को तो गिरफ्तार करने में भी पुलिस को नाकों चनें चबाने पड़ गए थे। बता दें कि एक आपराधिक मामले में रामपाल को कोर्ट ने 43 बार हाजिर होने को कहा, लेकिन वह कोर्ट के सामने हाजिर नहीं हुआ। इसके बाद पुलिस गैर जमानती वारंट लेकर उसे गिरफ्तार करने निकली। 5 नवंबर को रामपाल के समर्थकों ने अंबाला, पंचकुला और चंडीगढ़ में रेल व सड़क यातायात रोक दिया। 9 नवंबर को जब पुलिस उसे गिरफ्तार करने के लिए सतलोक आश्रम पहुंची तो पुलिस को उसके समर्थकों ने अंदर घुसने ही नहीं दिया। पुलिस ने बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश की, रामपाल को समर्पण करने को कहा, लेकिन कुछ काम नहीं आया। कथित संत के 15000 समर्थकों ने पुलिस पर हमला बोल दिया था। रामपाल के समर्थकों ने अंदर से पुलिस पर गोलियां, पत्थर, पेट्रोल बम और एसिड बम भी फेंके गए थे। समर्थकों का कहना था कि रामपाल को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस को 1 लाख लोगों को मारना होगा। 9 नवंबर से 18 नवंबर तक सतलोक आश्रम बरवाला (जिला हिसार) के अंदर और बाहर यह ड्रामा चलता रहा। पुलिस ने आश्रम की बिजली और पानी सप्लाई काट दी थी। आश्रम के अंदर राशन जाने के भी सारे रास्ते बंद होने के बाद जब वहां इसकी कमी होने लगी तो लोग धीरे-धीरे बाहर आने लगे। वहां कई लोगों का तो कहना यह था कि वे अपनी मर्जी से अंदर रामपाल की गिरफ्तार के खिलाफ खड़े नहीं थे, बल्कि उन्हें कैद किया गया था और मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था। 18 नवंबर को आखिरकार 20 हजार सुरक्षाकर्मी और पुलिसकर्मी आश्रम में घुसने में सफल रहे। लेकिन रामपाल पुलिस के हाथ नहीं लगा। आखिरकार पुलिस ने जेसीबी का इस्तेमाल कर आश्रम की पिछली दीवार तोड़नी चाही तो कई लोगों ने पुलिस पर हमला बोल दिया। इस हमले में 28 पुलिस कर्मी घायल हो गए। इस पूरी घटना में 200 लोग जख्मी हुए और पांच महिलाओं व 18 महीने के एक बच्चे की लाश आश्रम से मिली। करीब 11 दिन की जद्दोजहद के बाद आखिरकार 19 नवंबर 2014 की रात रामपाल पुलिस के हत्थे चढ़ ही गया। रामपाल के साथ ही उसके 492 समर्थकों को भी देशद्रोह, हत्या, हत्या का प्रयास, षणयंत्र, अवैध हथियार जमा करने और लोगों को आत्महत्या के लिए उकसाने व बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए। इसके साथ ही आश्रम को बंद कर दिया गया।
साल 2006 में रामपाल ने आर्य समाज की किताब ‘सत्यार्थ प्रकाश’ पर उंगली उठायी थी। रामपाल ने इसके कुछ हिस्सों को अव्यवहारिक और असामाजिक करार दिया था। इससे आर्य समाज के लोग नाराज हो गए। समाज के लोगों ने रामपाल के आश्रम को घेर लिया, जिसके बाद 12 जुलाई 2006 को दोनों पक्षों में हिंसक झड़प हुई। इस झड़प में सोनू नाम के एक व्यक्ति की गोली लगने से मौत हो गई थी और 59 अन्य घायल हो गए थे। कथित संत रामपाल को इस मामले में हत्या व हत्या के प्रयास के मामले में गिरफ्तार किया गया और उस वक्त वह 22 महीने जेल में भी रहा था। उसके समर्थकों का कहना था कि रामपाल को गलत तरीके से फंसाया गया है। 2006 में ही रामपाल के खिलाफ करौंथा आश्रम जमीन धोखाधड़ी मामले में भी एक केस दर्ज हुआ। साल 2008 में जेल से छूटने के बाद रामपाल ने बरवाला, हिसार में अपना आश्रम बनाया।
सतलोक आश्रम की स्थानपना साल 1999 में हुई थी। यह आश्रम रोहतक जिले के करौंथा गांव में बनाया गया। कथित संत रामपाल खुद को कबीर पंथ का अनुयायी कहता है। उसके भक्तों के अनुसार वह कबीर का ही अवतार है। रामपाल और कबीर पंथ के लोग मंदिर, मूर्ति पूजा, छुआछूत, व्यभिचार और अभद्र गीत व डांस को भी बुरा मानते हैं।
रामपाल का असली नाम रामपाल सिंह जाटिन है और वह उसका जन्म सोनीपत जिले में गोहना तहसील के धनाना गांव में हुआ था। उसके पिता नंद लाल एक किसान थे और मां इंदिरा देवी एक गृहणी। रामपाल ने खुद निलोखेरी आईटीआई से डिप्लोमा लिया और सालों तक हरियाणा सरकार के सिंचाई विभाग में जूनियर इंजीनियर के तौर पर काम भी किया। साल 1996 में उसने नौकरी छोड़ दी और 1999 में सतलोक आश्रम की स्थापना की। रामपाल के दो लड़के और दो लड़कियां भी हैं।

 

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