मुंबई -अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखेंगे मोदी

बुलेट ट्रेन परियोजना जिसका निर्माण पूर्व निर्धारित समय सीमा से डेढ़ साल पहले आजादी की 75वीं वर्षगांठ तक पूरा करने का नया लक्ष्य तय किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे 14 सितंबर को गुजरात के अहमदाबाद में मुंबई -अहमदाबाद हाईस्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखेंगे। रेल मंत्री पीयूष गोयल ने एक लाख करोड़ रुपए के अधिक की लागत वाली इस परियोजना को रेलवे की भावी तस्वीर करार देते हुए कहा है कि 14 सितंबर को 160 साल पुरानी भारतीय रेल का परावर्तन आरंभ होने जा रहा है। आबे अपनी पत्नी आकी आबे के साथ 13 सितंबर को अहमदाबाद आएंगे। वह प्रधानमंत्री मोदी के साथ शाम को महात्मा गांधी के विश्वप्रसिद्ध साबरमती आश्रम का भ्रमण करेंगे। अगले दिन गुरुवार को सुबह दस बजे साबरमती स्थित रेलवे के स्टेडियम में दोनों प्रधानमंत्री बुलेट ट्रेन परियोजना की आधारशिला रखेंगे। वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से वडोदरा में इसी परियोजना को लेकर एक प्रशिक्षण केन्द्र का भी शिलान्यास करेंगे।

रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा इस कदम से रेलवे का कायाकल्प हो जाएगा। बुलेट ट्रेन भारतीय रेलवे में वह परिवर्तन लेकर आएगी, जो मारुति कार ऑटोमोबाइल क्षेत्र में लेकर आई थी। बुलेट ट्रेन आने से रेलवे में बड़े परिवर्तन देखने को मिलेंगे। इससे आधुनिक तकनीक आने के साथ अर्थव्यवस्था को लाभ के साथ रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे। भारत बुलेट ट्रेन की लागत कम कर विदेशों में उसका निर्यात कर सकता है। इससे अन्य ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाने तथा उन्हें सुरक्षित चलाने की प्रेरणा भी मिलेगी। क्योंकि आज तक एक भी दुर्घटना न होने के कारण जापानी शिंकांशेन बुलेट ट्रेन तकनीक विश्व में सर्वाधिक सुरक्षित मानी जाती है। गोयल के मुताबिक, पीएम मोदी के प्रभाव के कारण भारत को बुलेट ट्रेन के लिए 0.1 फीसद की नगण्य ब्याज दर पर कर्ज मिला है। यह अनुदान जैसा ही है। 50 सालों में शायद ही किसी परियोजना के लिए इतनी सस्ती दर पर ऋण मिला होगा। इस कारण बुलेट ट्रेन की लागत काफी कम होगी। गोयल ने कहा कि वैसे तो परियोजना को 2023 में पूरा होना है। लेकिन भारतीय इंजीनियरों की कार्यकुशलता को देखते हुए मुझे भरोसा है कि हम इसे 2022 में ही पूरा करने में कामयाब हो जाएंगे। जापान रेलवे ने भारत के संजीव सिन्हा को बुलेट ट्रेन परियोजना का सलाहकार बनाया है। संजीव राजस्थान के रहने वाले हैं और पिछले 20 साल से जापान में रह रहे हैं। अपनी नियुक्ति के बाद सिन्हा ने कहा, “मैं दो सरकारों के बीच सेतु का काम करूंगा। यह महत्वपूर्ण मगर काफी उलझाने वाली है। राजनीतिक इच्छा को जमीन पर उतारने में बहुत कुछ लगता है।”रातोरात नहीं बना सकते : सिन्हा ने कहा कि तेज रफ्तार वाली बुलेट ट्रेनों को रातोरात नहीं बनाया जा सकता, इसके लिए सावधानी भरी प्लानिंग जरूरी है।
जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे दो दिनी भारत यात्रा पर 13 सितंबर को आ रहे हैं। इसी दिन वे पीएम मोदी के साथ 12 वीं सालाना शिखर बैठक में भाग लेंगे। इसमें दोनों नेता बहुआयामी रिश्तों को नई रफ्तार देंगे। शिखर बैठक गुजरात की राजधानी गांधीनगर में होगी।

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