लद्दाख में भारत-चीन की सेना आमने-सामने, बैठक जारी

मंगलवार सुबह लद्दाख इलाके में पेंगोंग झील के उत्तरी किनारे पर दोनों सेनाओं के बीच टकराव की स्थिति आ गई। गतिरोध लगभग आधे घंटे तक चला और फिर दोनों पक्ष वापस चले गए। घुसपैठ की कोशिश में नाकाम होते देख चीनी सैनिकों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। पत्थरबाजी से दोनों तरफ सैनिकों को हल्की चोटें आने की खबर है। बुधवार को अब इसी मुद्दों पर बैठक चल रही है। पीपल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के सैनिक दो इलाकों फिंगर फोर और फिंगर फाइव में सुबह 6 से 9 के बीच भारत की सीमा में घुसने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन दोनों ही मौकों पर भारतीय जवानों ने उनकी कोशिश असफल कर दी। जब चीनी सैनिकों ने देखा कि उनकी कोशिश असफल हो गई है तब उन्होंने भारतीय सैनिकों पर पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। इसके बाद भारतीय जवानों ने भी पत्थर फेंके। इस इलाके पर दोनों अपना-अपना दावा करते रहे हैं। 1990 के दशक में भारत ने इस इलाके पर दावा किया था तो चीनी सेना ने यहां एक सड़क बनाकर इसे अक्साई चीन का हिस्सा बता डाला था। हालांकि बाद में भारत ने इसे अपने नियंत्रण में ले लिया था। पेंगोंग हिमालय में एक झील है। जिसकी ऊंचाई लगभग 4500 मीटर है। यह 134 किमी लंबी है और भारत के लद्दाख से तिब्बत पहुंचती है। इस झील का करीब 60 फीसदी हिस्सा चीन में है। तिब्बत की निर्वासित सरकार के नेता लोबसांग सांगे ने पेंगोंग झील के पास 5 जुलाई को तिब्बत का झंडा फहराया था। इसका चीनी मीडिया ने काफी विरोध भी किया था। चीनी विदेश मंत्रालय का कहना था कि यह झील आधी भारत में है और आधी तिब्बत में, ऐसे में यहां ‘तिब्बत की निर्वासित सरकार का झंडा’ फहराया जाना सांगे का अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित करने की कोशिश लगती है।

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