भारत डोकलाम पर इन दो विकल्‍पों पर विचार कर रहा है

भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर दोनों ही देश इस मामले में अपने कदम पीछे खींचने को राजी नहीं हैं। पिछले दिनों इसी मुद्दे पर भारत के राष्‍ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन के राष्‍ट्रपति और वहां के एनएसए से भी बैठक की थी। इसके बाद भी दोनों ही तरफ से सीमा पर सेना का जमावड़ा जारी है। इस बीच चीन के राष्‍ट्रपति की तरफ से बार-बार यह बयान दिया गया है कि उनकी सेना हर तरह से तैयार है। दो माह से जारी इस तनातनी के बीच भारत भी अपने रुख पर कायम है। लेकिन इसके साथ-साथ भारत इस मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का भी प्रयास लगातार कर रहा है। यही वजह है कि ब्रिक्स देशों के एनएसए की मीटिंग के लिए चीन गए अजीत डोभाल ने वहां राष्ट्रपति शी चिनफिंग से भी मुलाकात की थी। चीन ने एक दिन पहले ही इस बात को माना है कि डोकलाम एक विवादत क्षेत्र है। इससे पहले वह हर बार यही कहता रहा है कि यह चीन का इलाका है और यहां पर कभी उसके चरवाहे अपनी भेड़ें चराते थे।

भारत इस मुद्दे को सुलझाने के लिए दो विकल्‍पों पर काम कर रहा है। इन विकल्‍पों में पहला विकल्‍प यह है कि डोकलाम और भूटान की चीन से लगती सीमा से भारतीय फौज को हटाकर वहां पर भूटान की आर्मी को तैनात किया जाए। लेकिन इससे पहले चीन को भी वहां से अपनी सेनाएं हटानी होंगी। दूसरे विकल्‍प के तौर पर इस मामले को नंवबर तक खींचा जाए और इस बीच बातचीत कर मामले का शांतिपूर्ण हल तलाशने की कोशिश की जाए। इन दो विकल्‍पों में यदि विचार किया जाए तो पहला विकल्‍प शायद चीन को रास न आए। इसकी वजह यह भी है कि चीन इस जगह से अपनी सेना को पीछे हटाने के लिए राजी नहीं है। चीन बार-बार भूटाने के इलाके में भारतीय सेना की मौजूदगी को लेकर शिकायत करता रहा है।

 

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