डिजिटल करेंसी का भविष्य

500 और 1000 के नोट बंद होने के बाद देशभर में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन या भुगतान कई गुना बढ़ गया है। लेनदेन के लिए क्रेडिट-डेबिट कार्ड यानी प्लास्टिक मनी तकरीबन हर पर्स में पहुंच गई है। तो क्या अब ये कहा जा सकता है कि जमाना प्लास्टिक मनी का पूरी तरह आ गया है? नहीं। भविष्य डिजिटल मनी या डिजिटल करेंसी का है। डिजिटल मनी को आने वाले समय के लिए कैश का बेहतर विकल्प माना जा रहा है।
बिटकॉइन को दुनिया भर में सबसे तेज और आसानी से स्वीकार की जाने वाली डिजिटल करेंसी मानी जाती है। लोकिन भारत में ये अभी तक दूर की कौड़ी है। आरबीआई इस संबंध में अपनी राय दे चुकी है। फिलहाल भारत में 22 फीसद उपभोक्ता कैशलेस लेनदेन करते हैं और डिजिटल, प्लास्टिक मनी, नेट बैंकिंग, चेक और ड्राफ्ट के जरिए अपना भुगतान करते हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक भारत में सिर्फ डिजिटल मनी का उपयोग लगभग 3500 अरब रुपये तक पहुंच जाएगा।

क्या है प्लास्टिक मनी
प्लास्टिक मनी का चलन इस उद्देश्य से हुआ था कि लोग जेबों में नोट भरकर चलने की बजाए एक ऐसे माध्यम का इस्तेमाल करें ताकि पैसा एक खाते से दूसरे खाते में सीधे ट्रांसफर हो जाए। प्लास्टिक मनी के सफल होने की सबसे बड़ी वजह ये थी कि आम उपभोक्ता के मन में ये डर नहीं होता कि किसी चीज की क्या कीमत चुकानी पड़ेगी। प्लास्टिक मनी के रूप में क्रेडिट कार्ड, डेबिट कार्ड, ट्रेवल कार्ड, फूड कार्ड, Rupay प्रीपेड कार्ड आदि को रखा जाता है। भारत कैशलेस लेनदेन के रूप में इनका इस्तेमाल किया जाता है।

ये हैं प्लास्टिक मनी
क्रेडिट कार्ड- यह प्‍लास्टिक मनी है जो विशिष्‍ट स्‍थानों में खरीदारी करने, सेवाएं प्राप्‍त करने और आपात काल में कार्ड के लिए निर्धारित सीमा तक नकद देने की सविधा प्रदान करते हैं।
डेबिट कार्ड- डेबिट कार्ड एक व्यक्तिगत कार्ड होता है जो बैंक द्वारा ग्राहक को पैसे निकलने के लिए अथवा किसी भी खरीद का मूल्य सीधे ग्राहक के खाते से चुकाने के लिए प्रदान किया जाता है।
गिफ्ट कार्ड- ये बैंक, मर्चेंट स्टोर की ओर से अपने ग्राहकों को दिये जाते हैं। इससे अपनी इच्छानुसार उनकी पसंद की स्टोर से खरीददारी करने की छूट देता है।

क्या है ई-वॉलेट
ई-वॉलेट पैसे रखने का वर्चुअल (डिजिटल) पर्स है, जिससे आप अपने लिए खरीदारी कर सकते हैं या सेवाओं का भुगतान कर सकते हैं। इससे खरीदारी से पहले मोबाइल की तरह ही रिचार्ज किया जाता है। इसके अलावा अपने डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या ऑनलाइन बैंकिंग के जरिए ई-वॉलेट में पैसे ट्रांसफर भी कर सकते हैं। ई-वॉलेट से खरीदारी के लिए अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड के रिकॉर्ड की जानकारी देने की जरूरत नहीं होती है।

ये हैं ई-वॉलेट
• Paytm- इसमें डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड के जरिए पैसा ट्रांसफर कर लेनदन कर सकते हैं।
• PayPal- कंपनिया अपने यूजर से पैसे लेकर डिजिटल करेंसी की सुविधा देती हैं।
• eCash- इसे भी ई वॉलेट कहा जाता है। ये भी अपने यूजर से पैसे लेकर डिजिटल करेंसी की सुविधा देती हैं।
• M-Pesa – इसके जरिए मोबाइल से पैसे ट्रांसफर किये जाते हैं।
• Google wallet: इसे फोन के जरिए इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका में इसका चलन है। यह फोन के जरिए यूजर के क्रेडिट और डेबिट कार्ड का इस्तेमाल करता है।

क्या है डिजिटल करेंसी (मनी)
एक ऐसी करेंसी जिसे न तो हम देख सकते हैं न छू सकते हैं और न ही अपने वॉलेट में रख सकते हैं। इसे इलेक्ट्रॉनिक रूप में अपने फोन, कंप्यूटर, लैपटॉप या किसी स्टोरेज मीडिया में स्टोर कर सकते हैं। ऐसी ही एक ऑनलाइन करेंसी है जिसका नाम है बिटकॉइन, जो कि न तो कॉइन है न नोट है ये सिर्फ एक वर्चुअल करेंसी है।
डिजिटल मनी को डिजिटल मुद्रा भी कहते हैं। बैंक नोट और सिक्कों की बजाए इसे भी लेनदेन में इस्तेमाल किया जाता है। यह इंटरनेट आधारित माध्यम है। इसे भी मुद्राओं की तरह सामान खरीदने और सेवाओं के लिए इस्तेमाल किया जाता है। डिजिटल मनी भुगतान को तेज बनाता है। अनौपचारिक अर्थव्यवस्थाओं के आकार को कम करता है और पैसे के प्रवाह को अधिक पारदर्शी बनाता है।

कौन-कौन सी हैं डिजिटल मनी
• बिटकॉइन (BitCoin)- यह दुनिया का पहला ओपन पेमेंट नेटवर्क है। लेन-देन के लिए यह सबसे तेज और कुशल माना जाता है
• लाइटकॉइन (Litecoin)- इसका इस्तेमाल भी बिटकॉइन की तरह ही किया जाता है।
• रिप्पल मोनेट्री सिस्टम (Ripple Monetary System)- यह अपने भरोसे पर नेटवर्क पर आधारित मुद्रा प्रणाली है।

नॉर्मल करेंसी और वर्चुअल करेंसी में अंतर
नॉर्मल करेंसी एक साधारण कागज से बना होता है जिसकी वैल्यू भी वर्चुअल करेंसी की तरह ही होती है। कागज पर छपे नोट की वैल्यू दस रुपये, सौ रुपये या दस डॉलर इसलिए बन जाती है क्योंकि इसके पीछे कुछ अथॉरिटी, बैंक, सरकार और कुछ लोग होते हैं जो आपस में मिल कर फैसला करते हैं और ये तय करते हैं कि इस नोट की वैल्यू कितनी होगी। इसके बाद एक अथॉरिटी इसे कंट्रोल करती है। लोग भी उस नॉर्मल करेंसी पर भरोसा करते हैं कि इसकी वैल्यू दस रुपये या पांच सौ रुपये है। वहीं वर्चुअल करेंसी या डिजिटल करेंसी (बिटकॉइन) के लिए कोई भी केंद्रीय संस्था नहीं है जो इसे कंट्रोल कर सके। यह एक दूसरे के भरोसे पर ट्रेड करता है।

डिजिटल मनी की कब हुई थी शुरुआत
डिजिटल मनी की शुरुआत सबसे पहले 1990 में हुई थी। उस वक्त डॉट कॉम बबल (Dot-com bubble) ने इसका इस्तेमाल मुद्रा के रूप में किया था। 2006 में लिबर्टी रिजर्व नाम की कंपनी ने डिजिटल करेंसी सेवा की शुरुआत की। इसके यूजर डॉलर या यूरो को लिबर्टी रिजर्व डॉलर या यूरो में बदलवा सकते थे। इसके बदले उन्हें 1 फीसद शुल्क देना पड़ता था। बाद में इसका इस्तेमाल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए होने लगा। तब अमेरिकी सरकार ने इस सेवा को बंद कर दिया। इन दिनों डिजिटल करेंसी के रूप में बिटकॉइन (bitcoin) का सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जा रहा है। इसकी शुरुआत 2009 में हुई थी। बिटक्वाइन पूरी दुनिया में बहुत तेजी से फैलता गया और अब इसे हर जगह स्वीकार किया जाता है।

क्या है बिटकॉइन
बिटकॉइन एक नई इनोवेटिव डिजिटल टेक्नोलॉजी या वर्चुअल करेंसी है। इसको 2009 में सतोषी नाकामोतो नामक एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने प्रचलन में लाया था। कम्प्यूटर नेटवर्कों के जरिए इस मुद्रा से बिना किसी मध्यस्था के ट्रांजेक्शन किया जा सकता है। वहीं, इस डिजिटल करेंसी को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है। यह दुनिया का पहला ओपन पेमेंट नेटवर्क है। लेन-देन के लिए यह सबसे तेज और कुशल माना जाता है। यह एक ऐसी करेंसी है, जिस पर किसी देश की सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।
बिटकॉइन को चलाने वाली कोई संस्था नहीं है। जो लोग भी इसमें भरोसा करते हैं वो खुद-एक दूसरे पर भरोसा कर आपस में ट्रेड करते हैं। इसको किसी भी सरकार या बैंक का बैकअप नहीं है। बिटकॉइन का ट्रेड वन टू वन हो सकता है। जो भी किसी दूसरे को बिटकॉइन भेजना चाहता है वो बिना किसी बैंक के सहारे बिना रोकटोक के भेज सकता है। इसके लिए बीच में किसी भी अथॉरिटी के तहत जाने की जरूरत नहीं है। उसके अलावा यहां यूजर का एकाउंट फ्रीज नहीं होता। यहां आप अपनी मर्जी से कुछ भी कर सकते हैं। बिटकॉइन में आप वो सभी काम कर सकते हैं जो आप बैंक में नहीं कर सकते हैं।
रुपया या डॉलर की तरह इसकी छपाई नहीं की जाती। इसे कंप्यूटर के जरिए बनाया जाता है। एक पहेली (मैथ्स प्रॉब्लम्स) को ऑनलाइन हल करने से बिटकॉइन रिवॉर्ड के रूप में मिलते हैं। साथ ही पैसे देकर भी इसे खरीदा जा सकता है। हजारों लोग, कंपनियां और नॉन प्रॉफिट ऑर्गनाइजेशन ने ग्लोबल बिटकॉइन को अपनाया है। बिटकॉइन को आप किसी भी देश में अपने वॉलेट से किसी और के वॉलेट में ट्रांसफर कर सकते हैं।

कैसे भेज या कमा सकते हैं बिटकॉइन
बिटकॉइन को कमाने का सबसे आसान तरीका है खरीददारी। यानी आप कोई गुड्स एंड सर्विसेज बेचते हैं तो इसके बदले कैश न लेकर बिटकॉइन ले सकते हैं। इसके बाद बिटकॉइन आपके ऑनलाइन अकाउंट में स्टोर्ड हो जाती है। बाद में इसकी कीमत घटती है या बढ़ती है ये यूजर के रिस्क पर होता है। यूजर बाद में इसे बेच सकते हैं। उदाहरण के लिए अगर बिटकॉइन की कीमत 750 डॉलर है और आपके पास कोई सामान है जिसकी कीमत 750 डॉलर है तो आप कैश की बजाए खरीददार से एक बिटकॉइन ले सकते हैं। इससे आपके पास एक बिटकॉइन हो जाएगा। इसके अलावा बिटकॉइन को माइन भी कर सकते हैं। और यही सबसे आसान तरीका है जिसकी वजह से बिटकॉइन मार्केट में आते हैं। बिटकॉइन की खरीद-बिक्री के लिए एक्सचेंज भी हैं, लेकिन उसका कोई औपचारिक रूप नहीं है। जबकि गोल्डमैन साक्स और न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज तक ने इसे बेहद तेज और कुशल तकनीक कहकर इसकी तारीफ की है। इसलिए दुनियाभर के बिजनेसमैन और कई कंपनियां आर्थिक लेनदेन के लिए इसका खूब इस्तेमाल कर रही हैं।

कैसे बनता है बिटकॉइन
बिटकॉइन बनाना सामान्य आदमी के बस की बात नहीं है। इसे बनाने वाले को माइंस कहते हैं। इसके लिए विशेष ट्रेनिंग और पावरफुल कंप्यूटर, शक्तिशाली जीपीयू और पावरफुल चीप की जरूरत होती है। बिटकॉइन के ट्रांजेक्शन के लिए एक सेट अप तैयार करते हैं। इसे वेरीभाई करने के लिए ट्रांजेक्शन के समय मैथ्स प्रौब्लम्स भी भेजे जाते हैं। दुनिया भर में कई ऐसे यूजर हैं जो बिटकॉइन को माइन करना चाहते हैं। ये लोग बिटकॉइन को माइन करने के लिए मैथ्स प्रौबलम्स को हल करने की कोशिश करते हैं। अगर वे सबसे पहले उन सवालों को हल कर देते हैं तो ट्रांजेक्शन पूरी हो जाती है और उन्हें रिवार्ड के रूप में कुछ बिटकॉइन मिल जाते हैं। इन्हीं तरीकों से बिटकॉइन मार्केट में आते हैं। एक बिटकॉइन को 8 डेसीमल प्वाइंट तक ब्रेक कर सकते हैं। रिवॉर्ड प्वाइंट के रूप में डेसीमल बिटकॉइन ही खर्च किये जाते हैं।

सबसे महंगी करेंसी
बिटकॉइन को ऑनलाइन बाजार में बेचा जा रहा है जिसकी कीमत 739.6 डॉलर है। इस करेंसी की कीमत रियल टाइम अपडेट होती रहती है। इसलिए इसकी कीमत हर वक्त बदलती रहती है। भारत में भी बिटकॉइन बनाने और इसका इस्तेमाल करने वालों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। भारत में एक बिटकॉइन की कीमत खबर लिखे जाने तक 50,650 रुपये है।
बिटकॉइन की वैल्यू कम न हो इस वजह से एक सीमीत संख्या में ही बिटकॉइन मार्केट में आ सकते हैं। फिलहाल सिर्फ 21 मिलियन बिटकॉइन ही दुनिया भर में प्रचलित हैं जो वर्ष 2140 तक माइन (रखे) किये जा सकते हैं। इससे ज्यादा बिटकॉइन वर्ष 2140 तक मार्केट में देखने को नहीं मिलेंगे।
• 1 बिटकॉइन- 739.6 डॉलर
• 1 बिटकॉइन- 595.0 पाउंड
• 1 बिटकॉइन- 50,650 रुपये
• 1 बिटकॉइन- 2720 यूएई दरहम
• 1 बिटकॉइन- 702.0 यूरो
• 1 बिटकॉइन- 523.1 जॉर्डन दिनार
• 1 बिटकॉइन- 5094 चाइनीज यूआन

बिटकॉइन पर आरबीआई का रुख
डिजिटल करेंसी (बिटकॉइन) को किसी भी केंद्रीय बैंक का समर्थन नहीं है, इसलिए निजी तौर पर ही इसके जरिए लेन-देन होता है। बिटकॉइन किसी कानूनी दायरे में नहीं आता है। आरबीआई ने भी बिटकॉइन की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंता जाहिर की थी। आरबीआई के पूर्व गर्वनर रघुराम राजन ने कहा था कि इसके पीछे किसी अथॉरिटी के नहीं होने से इसे सुरक्षित नहीं माना जा सकता। दूसरा इसके मूल्य के उतार-चढ़ाव को देखते हुए भी भारत में फिलहाल यह कम प्रभावी है।
हालांकि कुछ साल पहले आरबीआई ने ब्लॉकचेन तकनीक की तारीफ करते कहा था कि यह एक ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो बिटकॉन के लेनदेन का रिकॉर्ड रखता है। 2013 में आरबीआई ने बिटकॉइन समेत सभी वर्चुअल यूजर्स, खाताधारक, व्यवसाइयों को इसके इस्तेमाल के जरिए खुद को उजागर करने के खतरे के बारे में आगाह किया था।
2020 तक भारत में कितना होगा डिजिटल करेंसी का कारोबार
इंटरनेट दुनिया की दिग्गज कंपनी गूगल और बोस्टन कंस्टलटेंसी ग्रुप (बीसीजी) के रिपोर्ट की मानें तो 2020 तक भारत में डिजिटल मनी का उपयोग 500 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। आने वाले समय में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसकी भूमिका 15 फीसद तक हो सकती है। इतना ही नहीं 2023 तक जहां भी कैश के जरिए लेनदेन किया जाता वहां भी कैशलेस लेनदेन शुरू हो जाएगा। फिलहाल भारत के 9 शहरों ( दिल्ली, मुंबई, लखनऊ, बैंगलोर, लुधियाना, इंदौर, सूरत, विशाखापतन और कोयंबटूर में डिजिटल मनी के इस्तेमाल के लिए लगभग 3500 लोगों से इस संबंध में बातचीत की गई है।

बिटकॉइन की ये हैं खामियां
इस बैंक को किसी भी सेंट्रल बैंक का समर्थन नहीं है। इसलिए निजी तौर पर ही इसके जरिए लेनदेन होता है। बिटकॉइन किसी कानून के दायरे में नहीं आता है। एक सामूहिक नेटवर्क पर होने वाले लेनदेन किसी भी क्लियरिंग एजेंसी से होकर नहीं गुजरते हैं। जबकि होने वाली गड़बड़ी की जिम्मेदारी किसी की भी नहीं होती है, क्योंकि इसके लिए कोई भी कंट्रोलिंग एजेंसी नहीं है। इसके जरिए धन एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के बदले बहुत मामूली फीस ली जाती है।

mariah carey without makeup