हर उम्र की महिलाओं को एंट्री की इजाजत दी जानी चाहिए केरल ने SC से कहा

सबरीमाला मंदिर बोर्ड के चीफ गोपालकृष्णन ने नवंबर, 2015 में महिलाओं की एंट्री को लेकर विवादित बयान दिया था। बोर्ड चीफ के बयान का लोगों ने काफी विरोध किया और महिलाओं ने सोशल मीडिया पर #Happytobleed कैंपेन चलाया था। मंदिर बोर्ड चीफ गोपालकृष्णन ने कहा था, जब तक पीरियड्स का टेस्ट करने वाली मशीन नहीं बन जाती है, महिलाओं को मंदिर में एंट्री नहीं मिलेगी। अभी हथियारों की जांच करने वाली मशीनें हैं, लेकिन औरतों के पीरियड्स के बारे में पता लगाने की कोई मशीन नहीं है। ऐसे में, उनकी शुद्धता का पता लगाना काफी मुश्किल होता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था महिलाओं को मंदिर जाने से नहीं रोका जा सकता। केरल सरकार ने सोमवार को सबरीमाला मंदिर में एंट्री मामले पर सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस मंदिर में हर उम्र की महिलाओं को एंट्री की इजाजत दी जानी चाहिए। पिछले दिनों जस्टिस दीपक मिश्रा की बेंच ने कहा कि महिलाओं को मंदिर के अंदर जाने से नहीं रोका जा सकता है। मंदिर बोर्ड की इस दलील पर भरोसा नहीं किया जा सकता है कि यहां 1500 साल से महिलाओं की एंट्री पर रोक है। बेंच ने त्रावणकोर देवासम बोर्ड के वकील केके वेणुगोपाल से पूछा, क्या धार्मिक मान्यताओं के अलावा इसका कोई अन्य कारण है? इस मंदिर में परंपरा के मुताबिक, 10 से 50 साल की महिलाओं की एंट्री पर बैन है। मंदिर बोर्ड की मानें तो यहां 1500 साल से महिलाओं की एंट्री पर बैन का नियम है। यह उनकी शुद्धता (पीरियड्स) से जुड़ा हुआ है। केरल के यंग लॉयर्स एसोसिएशन की ओर से इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 2006 में पीआईएल दाखिल की गई थी। इस मामले की अगली सुनवाई 8 फरवरी को होगी।

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