हताशा में हमले, चहेता इंजिनियर

हताशा में हमले

जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर आतंकी हमला हुया है। आतंकियों द्वारा यह हमला हताशा में किया गया कार्य है। उनमें यह हताशा अकारण ही नहीं है। इसके दो प्रमुख कारण है। पहला यह कि जम्मू-कश्मीर में भारी मतदान हो रहा है दूसरा यह कि सज्जाद लोन जैसे अलगाववादी इस चुनाव में हिस्सा ले रहे हैं। घाटी के मुट्ठी भर अलगाववादी और पाक प्रायोजित आतंकवादी संगठन हमेशा यही चाहते हैं कि घाटी में अशांति फैलाई जाय। परंतु अपनी मंशा में वह हर बार ही नाकाम रहते हैं। वर्तमान में जम्मू-कश्मीर में हो रहा विधानसभा चुनाव उनकी आंखों की किरकिरी है। अब तक अपनी तमाम कोशिशों के बावजूद इसमें वे इसमें खलल डालने में सफल नहीं हो पा रहे थे, और इसी कारण से यह कायराना हमला किया गया है। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन आतंकवादियों और अलगाववादियों का लोकतंत्र में कोई विश्वास नहीं है, लेकिन कश्मीर की जनता अब इन पर भरोसा नहीं कर रही है। इनके तमाम प्रयासों के बावजूद लोग जिस तरह से चुनावों में भाग ले रहे हैं वह इन लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। खासकर सूबे में आई बाढ़ के बाद सेना ने लोगों की जिस तरह से मदद की थी। यह भी लोगों को ध्यान है कि उस दौरान किस तरह से यह अलगाववादी राहत कार्य को ही बाधित करने की कोशिश करते रहे। यह बात सज्जाद लोन जैसे लोगों के समझ तो आ गई लेकिन अभी कुछ लोग ऐसे हैं जो इस सच्चाई का सामना करने से बच रहे हैं। वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि सारी समस्यायों का हल लोकतांत्रिक तरीके से ही निकाला जा सकता है। इसके अलावा आतंकियों के हताशा की एक और वजह यह है कि कश्मीर में भाजपा की बढ़ती सक्रियता। इससे पहले किसी भी चुनाव में भाजपा ने इतने बड़े पैमाने पर भाग नहीं लिया था। परंतु इस बार स्थिति अलग है। इस चुनाव में भाजपा न सिर्फ सक्रिय रुप से भाग ले रही है बल्कि वह एक फैक्टर भी है। सूबे की दोनों प्रमुख पार्टियों एनसी और पीडीपी के निशाने पर कांग्रेस की बजाय भाजपा ही है। इतना ही नहीं प्रधानमंत्री भी कश्मीर के चुनावों में लगातार अपनी सभायें कर रहे हैं। आतंकियों का यह हमला लोकतंत्र के इसी पर्व में बाधा पहुंचाने की कोशिश है। हकीकत यह है कि बाकी बचे हुए चरणों में अब घाटी और सरहद से लगे इलाकों में मतदान होना है। जिसके लिये चुनाव प्रचार अपने चरम पर है। इसी दौरान प्रधानमंत्री की भी एक चुनावी सभा भी होनी है। यह भी एक दुर्यसंयोग ही है कि यह घटना उसी दिन घटी जिस दिन पाकिस्तान का आतंकी सरगना, पकिस्तानी सरकार के सहयोग से एक रैली में भारत के खिलाफ जहर उलग रहा था। उसी दिन इस कायराना घटना को अंजाम दिया गया। लेकिन पाकिस्तान को यह समझ लेना चाहिये कि भारत में लोकतंत्र की जड़े इतनी मजबूत हैं कि इस तरह की कायराना हरकतों से उसको कोई असर नहीं होता।

– गुरमीत सिंह

चहेता इंजिनियर

देश के सबसे बड़े प्रदेश उत्तर प्रदेश की सरकार का सरकारी तंत्र किस तरह से सड़ चुका है इसका ताजा उदाहरण है सरकार का सबसे चहेता इंजिनियर यादव सिंह। इस इंजिनियर की कहानियां कुछ ऐसी हैं कि एक नामी अखबार ने तो इस इंजिनियर को सरकारी दामाद की संज्ञा दे दी। और इस तरह की संज्ञा क्यों न दी जाय। आयकर के छापे में नोएडा प्राधिकरण सहित दो अन्य प्राधिकरणों के इंजीनियर इन चीफ यादव सिंह के यहां करीब सौ करोड़ रुपये की अघोषित संपत्ति मिलती है। लेकिन हैरानी यह है कि एक इंजीनियर के घपले घोटालों का पता तब तक नहीं लगता जब तक कि वह हजारों करोड़ों का घोटाला नहीं कर लेता। सूबे में सरकारें तक बदल जाती हैं लेकिन इस इंजीनियर के रुतबे पर कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन यदि कोई इमानदार अफसर इसके खिलाफ आवाज उठाने की कोशिश करता तो उसका ही तबादला कर दिया जाता है। इस भ्रष्ट इंजिनियर पर सरकारें ऐसी मेहरबान रहीं कि क्या कहना। एक सरकार इस जूनियर इंजीनियर की क्षमता देख कर इतनी प्रभावित हुई कि बीस असिस्टेंट इंजीनियरों को नजरअंदाज करते हुये इसे प्रमोट कर दिया, और यह कहा गया कि अगले तीन सालों में वह इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल कर लेगा। बाद में दूसरी सरकार ने भी उसकी इसी क्षमता से प्रभावित हो कर उसे और व्यापक प्रभार दे दिया। प्रश्न यह है कि आखिर इस इंजिनियर की यह विलक्षण प्रतिभा है क्या जिसे मायावती और अखिलेश सरकार ने बिना बिलम्ब किये ढ़ूढ निकाला? जाहिर सी बात है एक इंजिनियर रातों रात हजारों करोड़ों का मालिक नहीं बन सकता, और न तो वह ऐसा अकेले कर सकता है। उसके उपर जरुर किसी न किसी प्रभावशाली व्यक्ति या व्यक्तियों का हाथ होगा। यादव सिंह पहले मायावती के शासन काल में खूब फलता फूलता रहा। बाद में वर्तमान अखिलेश सरकार ने सत्ता संभालते ही उस पर जांच बिठाई भ्रष्टाचार का मामला सीबीसीआइडी को सौंपा। लेकिन नतीजा क्या निकला पहले जांच में देरी की गई और आरोपी को पाक-साफ बता दिया गया। इस भ्रष्ट इंजिनियर का रुतबा यह है कि इतना सब कुछ सामने आने के बाद भी उसको सस्पेंड नहीं किया गया है। मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि जांच रिपोर्ट आने के बाद उचित कार्रवाई की जायेगी। यह सड़ते तंत्र का ही कमाल है कि यादव सिंह जैसे भ्रष्टाचारी फल फूल रहे हैं।

– कृष्ण ध्यान त्रिपाठी

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