टमाटर

टमाटर का उपयोग संसार में सभी जगहों पर सब्ज़ी के रूप में किया जाता है। टमाटर का वानस्पतिक नाम सोलेनम लाइकोपरसिकम है। हरी साग सब्जियों में एवं फल के रूप में सर्वश्रेष्ठ टमाटर को माना गया है। भारी वर्षा वाली और शीत ॠतु को छोड़कर किसी भी ॠतु में इसके बीजों की पनीरी बनाकर इसे उगाया जा सकता है। अक्सर वर्ष में 2 बार मई-जून तथा अक्टूबर-नवम्बर मास में टमाटर बोये जा सकते हैं। बाज़ार में यह साल भर मिलते हैं। टमाटर की खेती प्रय: सभी जगह सफतापूर्वक की जाती है। संसार में आलू तथा शकरकन्द के बाद टमाटर ही सबसे अधिक पैदा की जाने वाली सब्जी है। इस समय टमाटर का प्रयोग सॉस (चटनी) बनाकर ज़्यादा किया जाता है। कच्चे टमाटर का सैण्डविच बनाकर खाना ज़्यादा पंसद करते हैं। टमाटर के पौधे छोटे है और फल पौधों पर काफ़ी संख्या में लदे हुए लगते हैं। इस किस्म के फल सामान्य तौर पर लगभग एक ही समय पर पकते हैं जो मध्यम से बडे अकार के होते हैं। हरे टमाटर की तुलना में लाल टमाटर को ज़्यादा फ़ायदे देने वाला बताया गया है, क्योंकि लाल टमाटर को तलने पर वह लाइकोपीन को अच्छे से आब्जर्व कर लेता है। टमाटर उष्णकटिबन्धीय जलवायु की फ़सल है, वैसे टमाटर को गर्मियों और सर्दियों दोनो मौसमों में उगाया जाता है इसके पौधे पाले से शीघ्र नष्ट हो जाते है यद्यपि टमाटर के बीज 21.44 – 24.22 डिग्री सेल्सीयस तापमान पर भी अंकुरित हो जाते हैं।

पौष्टिक तत्व
पौष्टिक गुणों के कारण टमाटर की गणना फलों में की जाने लगी है। 6 प्रकार के विटामिन में से टमाटर में पाँच प्रकार के विटामिन पाये जाते हैं। टमाटर में पोटाश, लौह, चूना, मैगजीन और लवण पर्याप्त मात्रा में है। टमाटर में खनिज क्षार-लौह, मैलिकएसिड, फास्फेट, ताजगी देने वाले और ख़ून साफ़ करने वाले खट्टे पदार्थ भी है। टमाटर में चूना अन्य फल-सब्जियों की तुलना में ज़्यादा पाया जाता है। टमाटर में लोहा तत्त्व बहुत ज़्यादा मात्रा में पाया जाता है। टमाटर में विटामिन ए, बी और सी ज़्यादा मात्रा में मिलता है। इतना अंगूर, संतरे में भी नहीं मिलते। संतरा और अंगूर से ज़्यादा लाभदायक टमाटर है। टमाटर में विटामिन ‘ए’ ज़्यादा पाया जाता है। विटामिन ‘सी’ टमाटर में बहुत अधिक मात्रा में मिलती है, जो बी-काँम्पलेक्स विटामिन का ही एक रूप है। टमाटर में लौह तथा अन्य क्षार प्रचूर मात्रा में मिलती है। सेब, मौसम्मी, सन्तरे, द्राक्ष (मुनक्का) आदि फलों की अपेक्षा इसमें ख़ून उत्पन्न करने की क्षमता कई गुणा अधिक होती है। टमाटर में ऑक्जेलिक एसिड अंशतः और साइट्रिक एसिड बहुत अधिक मात्रा में है। 100 ग्राम टमाटर में 0.9 प्रतिशत प्रोटीन, 0.2 प्रतिशत वसा, 3.6 प्रतिशत कार्बोहाइड्रेट आदि पोषक तत्त्व होते हैं।

टमाटर के फ़ायदे

टमाटर
पथरी, खांसी, आर्थराइटिस, सूजन या मांसपेशियों के दर्द में टमाटर के सेवन का निषेध किया गया है।
टमाटर लीवर, गुर्दा और अन्य रोगों पर महत्त्वपूर्ण काम करते हैं। यह आंतों को व्यवस्थित करते हैं।
प्रतिदिन 5 लाल टमाटर का सेवन करने से जितनी आवश्यकता विटामिन ‘ए’ की होती है, उतनी विटामिन मिल जाता है।
रोज 100 ग्राम टमाटर से 20 कैलोरी ऊर्जा शरीर को प्राप्त होती है। रोज़ 1 से 2 टमाटर खाने से चिकित्सक की आवश्यकता ही नहीं पड़ेगी।
टमाटर को सलाद के रूप में खाने से ज़्यादा लाभ होता है।
पके टमाटर भोजन के साथ लेने से भूख बढ़ती है, पाचन शक्ति मज़बूत होती है और ख़ून एवं पित्त से संबन्धित अनेक रोग दूर होते हैं।
टमाटर में फाइबर ज़्यादा व कैलरीज कम होती हैं, जो वजन घटाने में मदद करती है। इसमें मौजूद बीटा कैरोटिन भी शरीर के लिए बेहद फ़ायदेमंद है।
टमाटर का रस तन-मन को ताजगी एवं सुस्ती को दूर करती है।
टमाटर में तेजाबी अंश होते हैं, जो पेट को साफ़ रखता है।
कम वजन वाले लोग यदि भोजन के साथ पक्के टमाटर खाए तो लम्बे समय तक उनका वजन बढ़ता है।
टमाटर अम्लपित्त, आमवात, सन्धिवात (जोड़ों का दर्द), सूजन और पथरी के रोगियों के लिए यह अनुकूल है।
कमज़ोर शरीर वाले लोग के लिए भोजन के साथ टमाटर अवश्य खाने चाहिए।
टमाटर का खट्टा रस मनुष्य के जठर के लिए उपयोगी, जलन को शांत करता है, पेट का दर्द, मेदवृद्धि (मोटापा में वृद्धि), सारक, ख़ून को शुद्ध करता है और अग्निमान्द्य आदि के लिए लाभकारी है।
यह बवासीर, पीलिया और तेज़ बुखार को दूर करता है। सारक होने के कारण यह कब्जियत को मिटाते हैं।

टमाटर से होने वाले नुक़सान
उन लोगों को टमाटर नहीं खाना चाहिए, जिन्हें शीतपित्त का कष्ट हो, जिन लोगों के शरीर में गर्मी ज़्यादा हो, जठर, आंतों में उपदंश हो और दस्त लग रहे हो तो ऐसे में टमाटर का सेवन करना लाभदायक नहीं है और इसका सूप भी नहीं पीना चाहिए।
तेज़ खाँसी में और पथरी के रोगी को टमाटर नहीं खाना चाहिए।
मांस पेशियों में दर्द तथा शरीर में कहीं सूजन हो तो टमाटर नहीं खाना चाहिए।

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